सनातन धर्म और गौ सेवा को समर्पित : श्रीधर आश्रम


वैष्णव पत्रिका :- श्रीधर जी महाराज का जन्म मध्यप्रदेश के देवास जिले में हुआ। देवास उज्जैन से 38 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। श्रीधर जी महाराज की शिक्षा-दीक्षा मध्यप्रदेश में 1975 में संपूर्ण हुई और वह धर्म प्रचार का लक्ष्य देकर देवास, उज्जैन छोड़ भारत भ्रमण पर निकल पड़े और उन्हे नहीं पता था उनका लक्ष्य नजदीक ही उनका इन्तजार कर रहा हैं वे वहां से निकल बीकानेर राजस्थान पहुंचे। उस समय बीकानेर में धर्मसंसद के आयोजन की तैयारियां चल रही थी और भारत के अधिकांश साधु संत बीकानेर आने का विचार बना रहे थे। उन सभी संतो की बीकानेर आने की इच्छा होना भी स्वाभाविक थी क्योंकि इस धर्मसंसद का नेतृत्व स्वयं धर्म सम्राठ करपात्री जी महाराज के कर कमलों से होना था। जैसे ही श्रीधर जी महाराज को यह मंगल सूचना प्राप्त हुई की धर्म संसंद का सानिध्य देश के महामण्डलेश्वरों के साथ प्राप्त किया जा सकता हैं उन्होने बीकानेर जाने का दृढ़ निश्चय बना लिया ऐसा लग रहा था कि शायद उनकी मंजिल बीकानेर ही हैं। श्री श्री निरंजनदेव जी महाराज भी इस धर्मयज्ञ में साक्षी थे और इसी धर्मसंसद के दौरान श्रीधर जी महाराज को देवीकुण्ड सागर में बने एक राम-लक्ष्मण तपोभूमि के प्रबन्धन का दायित्व प्राप्त हुआ। इस पवित्र धरा पर श्रीधर जी महाराज से पूर्व
राम-लक्ष्मण नामक तपस्वी सनातनी रहा करते थे। श्रीधर जी महाराज और श्री श्री सर्वेश्वरानंद सरस्वती जी जो कि करपात्री जी महाराज के शिष्य हैं दानों धर्म प्रचारकों को महामण्डलेश्वरों और धर्म सम्राठों द्वारा इस आश्रम का दायित्व सौंपा गया। भारत वर्ष में श्री श्री सर्वेश्वरानंन्द सरस्वती जी के पास वैसे तो कई धार्मिक स्थानों का जिम्मा हैं लेकिन मुख्यत वे करपात्री धाम, केदार घाट वाराणसी, उत्तरप्रदेश सत्संग करते हैं। 1980 से आज तक इस आश्रम को कोई सरकारी सहायता प्राप्त नहीं हुई। यह आश्रम 35 से 40 विद्यार्थीयो से युक्त हैं जिसकी डिग्री संपूर्णानंद विश्वविद्यालय द्वारा दी जाती हैं। इस आश्रम कें पुनः निर्माण में बीकानेर शहर के एक विद्वान कर्मकाण्ड विशेषज्ञ शिवरतन जी किराडू भी अहम् रहे। बीकानेर के नियममित धर्मसंगत घरानों में अशोक मोदी, कुन्दन मल बोहरा, मोहनसिंह जी, श्याम जी व्यास, मांगीलाल जी शर्मा अनेक भक्तों ने सहयोग किया और कर रहे हैं।
आज भी यहां गौशाला और पानी की समस्या हमें लज्जित कर देती हैं कि हम गौरक्षा और गौ हत्या बंद कराने का पक्ष लेने वाले लोग हमारी गायों के आवास का प्रबन्धन नहीं कर पा रहे हैं। 10 लाख रूपये अनुमानित राशि से हमारी यहां रहने वाली गौमातायें सुरक्षित हो सकती है। यदि किसी गौ भक्त का ईमान या गौ भक्ति जाग जाये तो ये बीड़ा उठाना धर्म के लिए गर्व का कारक साबित हो सकता हैं। वसुदेव कुटुम्बकम् और सादा जीवन उच्च विचार की बाते सीखाने वाले श्रीधर जी महाराज राजनीति को धर्म संगत चलने कर सीख देते हैं और वे कहते हैं यदि राजनीति धर्मसंगत ना हो तो वह धंधा याव्यवसाय का रूप ले लेती हैं।वैष्णव पत्रिका

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