गुरु पूर्णिमा को होने वाला ग्रहण भारत में दिखाई देगा। इस बार आषाढ़ मास की पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण हो रहा है। भारत के साथ ही ये ग्रहण आस्ट्रेलिया, अफ्रीका, एशिया, यूरोप और दक्षिण अमेरिका में दिखाई देगा। गुरु और चन्द्रमा दोनों ग्रह हमारे दैनिक जीवन को काफी प्रभावित करते हैं। पंडित नन्द किशोर किराडू के अनुसार अनुसार मंगलवार, 16 जुलाई 2019 की रात करीब 1.30 बजे से ग्रहण शुरू हो जाएगा। इसका मोक्ष 17 जुलाई की सुबह करीब 4.30 बजे होगा। पूरे तीन घंटे ग्रहण रहेगा। 149 साल पहले ऐसे दुर्लभ योग बने थे। 12 जुलाई, 1870 को 149 साल पहले गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण हुआ था। उस समय भी शनि, केतु और चंद्र के साथ धनु राशि में स्थित था। सूर्य, राहु के साथ मिथुन राशि में स्थित था।

क्या रहेगा राशियों पर ग्रहण का असर

मेष राशि
इस राशि के लिए ग्रहण के योग शुभ रहने वाला है। इन लोगों को सफलता के साथ ही मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। धन लाभ मिलने की संभावनाएं हैं। कई पैतृक सम्पति से जुड़े फैसले मेष राशि जातको के हक़ में हो सकते हैं।

वृषभ राशि
आपके लिए समय कष्टदायी रहेगा। सावधान रहकर काम करना होगा, क्योंकि धन हानि हो सकती है। व्यवसाय से जुड़े बड़े निर्णय अभी ना लेवे। इस ग्रहण के पश्चात आपको थोड़े समय तक शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता हैं।

मिथुन राशि
इनके लिए दुखद समय रहेगा। काम समय पर पूरे नहीं होंगे। बाधाएं आएंगी। आपका कुछ समय नकारात्मक सोच से ग्रसित रहेगा। आलस आपको हर कार्य टालने के लिए प्रेरित करेगा। धैर्य रखें और थोड़े अनुकूल समय का इंतज़ार करें ।

कर्क राशि
कर्क राशि के लिए उत्तम समय रहेगा। काम जल्दी पूरे होंगे और आशा के अनुरूप फल भी मिलेंगे। सुखद वातावरण रहेगा। परिवार में कुछ सुखद और मंगलमय होने के कारण आप आत्मविश्वासी बने रहेंगे।

सिंह राशि
तनाव बढ़ सकता है। बाधाओं की वजह से किसी काम में मन नहीं लगेगा। मन शांत रखें। कुछ दिन बाद समय पक्ष का हो जाएगा। सही समय का इंतज़ार करें थोड़े समय के बाद समय आपके अनुरूप हो जायेगा।

कन्या राशि
चिंताएं बढ़ सकती हैं। नौकरी में अधिकारियों का सहयोग नहीं मिलने से मन उदास रहेगा। बने बनाए काम बिगड़ सकते हैं। आपके बॉस और अधिकारीयों से आपकी बहस हो सकती हैं और उसका खामियाजा आपको भुगतना पड़ सकता हैं इसलिए कार्यस्थल पर आप विवादों से बचे।

तुला राशि
लाभदायक समय रहेगा। सोचे हुए काम समय पर पूरे कर पाएंगे। अविवाहितों को विवाह के प्रस्ताव मिल सकते हैं। आपके जीवन का कोई बड़ा और महत्वपूर्ण सपना पूर्ण होने की सम्भावना हैं।

वृश्चिक राशि
आपके लिए सावधान रहने का समय है। थोड़ी लापरवाही भी बड़ी हानि करवा सकती है। सावधान रहकर काम करना होगा, क्योंकि धन हानि हो सकती है। जल्दबाज़ी में कोई ऐसा निर्णय ना ले जिसके कारण आपको बाद में पछताना पड़े।

धनु राशि
सतर्कता रखनी होगी। कोई करीबी व्यक्ति धोखा दे सकता है। नौकरी में नुकसान होने के योग बन रहे हैं। यह समय आपके लम्बे समय से चल रहे विश्वास के टूटने का हैं। आपको कोई आपका निजी और करीबी व्यक्ति बड़ा धोखा दे सकता हैं।

मकर राशि
आपको इस समय संघर्ष करना होगा। पुरानी योजनाएं विफल हो सकती हैं। किसी अनजान व्यक्ति पर भरोसा न करें। अपने परिचित व्यक्तियों के बीच रहे और सकारात्मक संवाद करें। आपका तनाव आपको बड़ा नुकसान दे सकता हैं।

कुंभ राशि
इस राशि के लिए समय शुभ रहने वाला है। तरक्की मिल सकती है। कार्य समय पर पूरे हो जाएंगे और वर्चस्व बढ़ेगा। आपके कार्यस्थल पर आपकी प्रतिष्ठा बढ़ने का समय हैं। अपने इस सुखद समय अपनों के साथ बिताये।

मीन राशि
आपको लंबी दूरी की यात्रा पर जाना पड़ सकता है। इस यात्रा से लाभ मिलेगा। भविष्य को लेकर प्रसन्न रहेंगे। इस सफल यात्रा को आनंद के साथ पूर्ण करें और प्रकृति का आनंद ले। धार्मिक और व्यावसायिक दोनों यात्रायें लाभदायक रहेगी।

सूतक का समय
चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। सूर्य ग्रहण का सूतक ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरू होता है। चंद्र ग्रहण का सूतक काल दोपहर 4.30 बजे से शुरू हो जाएगा, जो कि 17 जुलाई की सुबह 4.31 बजे तक रहेगा।

सूतक से पहले करें पूजा-पाठ
16 जुलाई को गुरु पूर्णिमा होने से इस दिन विशेष पूजा-पाठ करने की परंपरा है। इस दिन अपने गुरु की पूजा की जाती है। इस दिन पूजन दोपहर 4.30 बजे से पहले ही करना होगा। उसके बाद सूतक काल शुरु हो जाने से पूजा-पाठ नहीं हो सकेगी।

ग्रहण के समय ग्रहों की स्थिति
शनि और केतु ग्रहण के समय चंद्र के साथ धनु राशि में रहेंगे। इससे ग्रहण का प्रभाव और अधिक बढ़ जाएगा। सूर्य के साथ राहु और शुक्र रहेंगे। सूर्य और चंद्र चार विपरीत ग्रह शुक्र, शनि, राहु और केतु के घेरे में रहेंगे। मंगल नीच का रहेगा। इन ग्रह योगों की वजह से तनाव बढ़ सकता है। भूकंपन का खतरा रहेगा। बाढ़, तूफान और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान होने के योग बन रहे हैं।

वैष्णव पत्रिका :- गुरु पूर्णिमा का पर्व आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को श्रद्धाभाव व उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। यह पर्व जीवन में गुरु की महत्ता को समर्पित है. सिक्ख धर्म में भी गुरु को भगवान माना जाता हैं इस कारण गुरु पूर्णिमा सिक्ख धर्म का भी अहम त्यौहार बन चुका है.

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया जाता है. भारतवर्ष में कई विद्वान गुरु हुए हैं, किन्तु महर्षि वेद व्यास प्रथम विद्वान थे, जिन्होंने सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) के चारों वेदों की व्याख्या की थी.

सिक्ख धर्म केवल एक ईश्वर और अपने दस गुरुओं की वाणी को ही जीवन का वास्तविक सत्य मानता है. सिक्ख धर्म की एक प्रचलित कहावत निम्न है:

‘गुरु गोविंद दोउ खड़े काके लागू पांव, बलिहारी गुरु आपने गोविन्द दियो बताए’।।

कहा जाता है कि आषाढ़ पूर्णिमा को आदि गुरु वेद व्यास का जन्म हुआ था. उनके सम्मान में ही आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. मगर गूढ़ अर्थों को देखना चाहिए क्योंकि आषाढ़ मास में आने वाली पूर्णिमा तो पता भी नहीं चलती है. आकाश में बादल घिरे हो सकते हैं और बहुत संभव है कि चंद्रमा के दर्शन तक न हो पाएं.

बिना चंद्रमा के कैसी पूर्णिमा! कभी कल्पना की जा सकती है? चंद्रमा की चंचल किरणों के बिना तो पूर्णिमा का अर्थ ही भला क्या रहेगा. अगर किसी पूर्णिमा का जिक्र होता है तो वह शरद पूर्णिमा का होता है तो फिर शरद की पूर्णिमा को क्यों न श्रेष्ठ माना जाए क्योंकि उस दिन चंद्रमा की पूर्णता मन मोह लेती है. मगर महत्व तो आषाढ़ पूर्णिमा का ही अधिक है क्योंकि इसका विशेष महत्व है.

आषाढ़ की पूर्णिमा ही क्यों है गुरु पूर्णिमा

आषाढ़ की पूर्णिमा को चुनने के पीछे गहरा अर्थ है. अर्थ है कि गुरु तो पूर्णिमा के चंद्रमा की तरह हैं जो पूर्ण प्रकाशमान हैं और शिष्य आषाढ़ के बादलों की तरह. आषाढ़ में चंद्रमा बादलों से घिरा रहता है जैसे बादल रूपी शिष्यों से गुरु घिरे हों. शिष्य सब तरह के हो सकते हैं, जन्मों के अंधेरे को लेकर आ छाए हैं. वे अंधेरे बादल की तरह ही हैं. उसमें भी गुरु चांद की तरह चमक सके, उस अंधेरे से घिरे वातावरण में भी प्रकाश जगा सके, तो ही गुरु पद की श्रेष्ठता है. इसलिए आषाढ़ की पूर्णिमा का महत्व है! इसमें गुरु की तरफ भी इशारा है और शिष्य की तरफ भी. यह इशारा तो है ही कि दोनों का मिलन जहां हो, वहीं कोई सार्थकता है.

गुरु पुर्णिमा पर्व का महत्व

जीवन में गुरु और शिक्षक के महत्व को आने वाली पीढ़ी को बताने के लिए यह पर्व आदर्श है. व्यास पूर्णिमा या गुरु पूर्णिमा अंधविश्वास के आधार पर नहीं बल्कि श्रद्धाभाव से मनाना चाहिए.

गुरु का आशीर्वाद सबके लिए कल्याणकारी व ज्ञानवर्द्धक होता है, इसलिए इस दिन गुरु पूजन के उपरांत गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए. सिख धर्म में इस पर्व का महत्व अधिक इस कारण है क्योंकि सिख इतिहास में उनके दस गुरुओं का बेहद महत्व रहा है.

गुरु पूर्णिमा का पर्व हिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ (जून- जुलाई) के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को  मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 16 जुलाई 2019 को मनाया गया था। यह नेपाल में मुख्य रूप से हिन्दू, बुद्ध और जैन धर्म के लोग मनाते है।

इस दिन गुरुओ, शिक्षको की पूजा और सम्मान किया जाता है। यह पर्व वर्षा ऋतु की शुरुवात में मनाया जाता है। मौसम बहुत ही सुखद होता है, न बहुत गर्मी होती है न बहुत सर्दी। ऐसे सुहावने दिनों में गुरु और शिष्य एक साथ एकत्र होकर ज्ञान बढ़ाते है। शिष्यों को नई दीक्षा और पाठ पढ़ाया जाता है।

गुरु पूर्णिमा के दिन ही संत कबीर के शिष्य संत घीसादास का जन्मदिवस भी मनाया जाता है।

इस दिन ही भगवान गौतम बुद्ध ने सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया था। इस दिन ही भगवान शिव ने सप्तऋषियो को योग का ज्ञान दिया था और प्रथम गुरु बने थे। गुरु का हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है।

“गुरु” शब्द गु और रु शब्दों से मिलकर बना है। गु का अर्थ है अन्धकार और रु का अर्थ है मिटाने वाला। इस प्रकार गुरु को अन्धकार मिटाने वाला या अंधकार से प्रकाश में ले जाने वाला कहा जाता है।

वैष्णव पत्रिका :सेठ तोलाराम बाफना एकेडमी की सीईओ डॉ पीएस वोहरा ने बताया कि सत्र 2018 19 के लिए सीबीएसई द्वारा आयोजित शाला की वाणिज्य संकाय की कक्षा बारहवीं तथा दसवीं का परिणाम शानदार रहा। इन दोनों कक्षाओं

में इस वर्ष पिछले वर्षों के परिणामों की तुलना मे श्रेष्ठतम परिणाम रहा।

उन्होंने बताया कि सत्र 2018 19 के लिए सीबीएसई द्वारा आयोजित वाणिज्य संकाय की कक्षा 12वीं में 90% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 9 रही वहीं 80% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 37 रही |
वाणिज्य संकाय की 12वीं कक्षा की परीक्षा में शाला की छात्रा कोमल अग्रवाल ने सर्वाधिक 96% प्रतिशत अंक प्राप्त किए वहीं इसी कक्षा के 5 विद्यार्थियों( वंशिका, मुस्कान बाफना,भव्या राठौड़ मिनीषा श्रीमाली एवं मुस्कान राठी ने पेंटिंग में 100 अंक प्राप्त किए। एकाउंटेंसी में 90% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 10 रही वहीं इकोनॉमिक्स में 95% से 100% के बीच अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 8 रही।

वहीं कक्षा दसवीं के परिणाम में 90% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 34 रही। दसवीं की परीक्षा में शाला की छात्रा स्मृति मेहता ने सर्वाधिक 96 प्रतिशत अंक प्राप्त किए ।

दसवीं की परीक्षा में विज्ञान विषय में 4 विद्यार्थियों ने 100 अंक प्राप्त किए वहीं सामाजिक ज्ञान विषय में 1 विद्यार्थी ने 100 अंक प्राप्त किए।

अंग्रेजी विषय में 90% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 17 रही। हिंदी में 90% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या विद्यार्थियों की संख्या 27 रही जबकि गणित में 90% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 47 रही जबकि विज्ञान में 90% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 65 रही। जबकि सामाजिक ज्ञान विषय में 90% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 61 रही।
इस वर्ष कक्षा दसवीं के परिणाम में कुल 169 विद्यार्थियों ने 69% से अधिक अंक प्राप्त किए इस शानदार परिणाम के लिए शाला सीईओ डॉ पीएस वोहरा ने समस्त शाला परिवार को बधाई दी।

बीकानेर। बीकानेर में आज एक युवा नेता कांग्रेस में शामिल हुआ हो गया है। भारत वाहिनी पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री भवानी पाईवाल ने आज राजस्थान के दिगज नेता व हाल ही मे कांग्रेस में शामिल हुवे धनश्याम तिवाड़ी की मौजूदगी में आज बीकानेर में कांग्रेस पार्टी शामिल हो गए। कविताओं व ओजस्वी भाषण से युवाओ में अपनी पहचान रखने वाले पाईवाल ने कहा कि आने वाले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस जीत के लिए भरसक प्रयास करेँगे।  देश की जनता ने परिवर्तन की ठान ली है जो आगामी चुनाव में देखने को मिलेगा सर्किट हॉउस  तिवारी के साथ शहर अध्यक्ष यशपाल गहलोत व् देहात महेंद्र गहलोत  मौजूद थे !