अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर एनएचएम कार्मिक

 वैष्णव पत्रिका ,बीकानेर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत संविदाकार्मिक मंगलवार से अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे। एनएचएम कार्मिकों ने सोमवार को नियमितीकरण, अनुभव अभिवृद्धि, मानदेय पुनर्निर्धारीकरण सहित 8 सूत्री मांगों को लेकर सामूहिक अवकाश पर जाने सम्बन्धी ज्ञापन सौंपकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ बी.एल. मीणा को अपनी मांगों से पुनः अवगत करवाया। सीएमएचओ ने भी संविदाकार्मिकों की मांगों को उचित बताते हुए समर्थन में एमडी एनएचएम को इस बाबत पत्र लिखा है। इससे चिकित्सा विभाग की दर्जनों योजनाओं और रिपोर्टिंग का कार्य पूरी तरह से ठप हो जाएगा। एनएचएम के प्रदेश कमेटी के आहृवान पर सामूहिक अवकाश पर जाने वाले सभी कार्मिकों का कहना है कि सरकार अपना वादे याद करे और संविदा कर्मियों की मांगों को सिर्फ कमेटी और फाइलों तक सीमित नहीं रखकर ठोस निर्णय लेकर आदेश जारी करें।

स्वास्थ्य सेवाएं होंगी बुरी तरह बाधित

एनएचएम कर्मी चिकित्सा विभाग की रीड़ है। जिले में डेढ़ सौ से ज्यादा एनएचएम कर्मियों के सामूहिक अवकाश पर जाने से स्वाइन फ्लू-मौसमी बीमारियों, गैर संचारी रोग, टीबी इत्यादि की रोकथाम, आयुष, शहरी स्वास्थ्य मिशन सेवाओं सहित राजश्री, आरबीएसके, जीवनवाहिनी जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं प्रभावित होंगी। मसलन स्वाइन फ्लू व अन्य मौसमी बिमारियों के लिए सर्वे, रिपोर्टिंग ठप हो जाएगी, आरबीएसके के तहत बच्चों की स्क्रीनिंग, ऑपरेशन, रेफरल व पीएचसी-सीएचसी के आयुष विभाग बंद हो जाएंगे, राजश्री योजना, जननी सुरक्षा योजना के भुगतान, आशा सहयोगिनियों को प्रेरक राशियों के भुगतान सहित स्वीकृतियां जारी करने जैसे समस्त वित्तीय कार्य व प्रतिवेदन थम जाएंगे, टीबी रोगियों की निक्षय आईडी बनाने से लेकर दवा पहुँचाने व 500 रूपए प्रतिमाह खाते में भेजने के काम नहीं हो पाएंगे, शहरी डिस्पेंसरियों के प्रबंधकीय व वित्तीय कार्य रुक जाएंगे, विभिन्न शिविरों के आयोजन व सेवाओं पर भी बुरा असर पड़ेगा।

क्या हैं प्रमुख मांगें ?

राजस्थान एनएचएम कार्मिक संघ के जिला सदस्य राजेश सिंगोदिया ने बताया कि राजस्थान सरकार ने मार्च 2012 में एनआरएचएम के संविदा पदों को नियमित करने की घोषणा की थी तथा वर्तमान सरकार ने भी एनएचएम में कार्यरत सभी सविंदा कार्मिको को नियमित करने एवं समस्या समाधान करने की बात अपने घोषणा पत्र में की, लेकिन अभी तक इस पर गंभीरता से गौर नहीं किया गया। वहीं कार्मिकों ने सरकार के गठन के बाद से ही एनएचएम संविदा कार्मिक विभिन्न समुहों में विभिन्न स्तरों पर, विभिन्न माध्यमों से अपनी बात वर्तमान सरकार तक पहुॅचाने का प्रयास कर रहे है लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। इसकी के चलते कार्मिकों ने ज्ञापन सौंपकर सामूहिक अवकाश पर जाने का मानस बनाया है और मांग की है कि राज्य सरकार के जन घोषणा पत्र में किए गए वादे अनुसार एनएचएम संविदा कार्मिकों को नियमित किया जाए। वहीं एनएचएम के अंतर्गत वर्ष 2017-18 से स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पॉलिसी लागु कर एनएचएम में कार्मिकों द्वारा तीन वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण करने पर एनएचएम कार्मिकों को 10 प्रतिशत एवं पांच वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण करने पर एनएचएम कार्मिकों को 15 प्रतिशत अतिरिक्त मानदेय अभिवृद्वि की स्वीकृति दी गई है, जिसे तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए। संविदा कार्मिकों के वेतन विसंगति दूर कर राज्य, जिला, ब्लॉक व पीएचसी स्तर तक के समस्त कार्मिकों का वेतन पुर्ननिर्धारण किया जाए। इसकी राशि केंद्र सरकार ने जारी कर दी है लेकिन अब तक राज्य सरकार ने इस पर रोक लगा रखी है। वहीं एनएचएम मे कार्यरत सभी कार्मिको को मेडिक्लेम पॉलिसी मे कवर किया जाए जिसके लिए भारत सरकार के द्वारा राशि स्वीकृति की जा चुकी है। इसके साथ ही राजस्थान एनएचएम कार्मिक संघ ने मांग की है कि पिछली सरकार ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए अनेक कार्मिकों पर पीएम दौरे के दौरान ज्ञापन देने पहुंचे एनएचएम कार्मिकों पर झुंझुनू में मुकदमें दर्ज किए गए, जिन्हें वापिस लिया जाए। इन मांगों को न माने जाने पर समस्त कार्मिकों ने 26 फरवरी से सामूहिक अवकाश पर जाने का निर्णय लिया है।

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