धारा-35 A पर आ सकता है फैसला, जम्मू-कश्मीर में सेना की 100 कंपनियां तैनात


 श्रीनगर. पुलवामा अटैक के 8 दिन बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों का मूवमेंट बढ़ने वाला है। गृह मंत्रालय ने चीफ सेक्रेटरी, जम्मू-कश्मीर सरकार, श्रीनगर होम मिनिस्ट्री को एक फैक्स मैसेज भेजा है। मैसेज में लिखा गया है कि जम्मू-कश्मीर में तुरन्त सीआरपीएफ की 45, बीएसएफ की 35, एसएसबी की 10 और आईटीबीपी की 10 कंपनियों को फौरन रवाना किया जाए। उन्हें वहां पर अगले आदेश तक वहां रखा जाएगा।

क्यों बढ़ा मूवमेंट : मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमवार को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली संविधान की धारा 35-A पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। ऐसे में घाटी में माहौल खराब होने का खतरा है इसलिए पहले से ही सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। यही वजह है कि अलगाववादी नेता यासीन मलिक को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

क्या है 35-A : इस आर्टिकल के तहत संविधान में जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा मिला है। 1954 के राष्ट्रपति के आदेश से ये संविधान में जोड़ा गया था। इस आर्टिकल के मुताबिक राज्‍य में स्‍थाई निवासियों की परिभाषा तय की गई है। इस आर्टिकल के जम्मू कश्मीर को ये अधिकार मिला है कि वो किसे अपना स्थाई निवासी माने और किसे नहीं। इसी के तहत जम्मू कश्मीर सरकार उन लोगों को स्थाई निवासी मानती है जो 14 मई 1954 के पहले कश्मीर में बसे थे। यहां के स्थाई निवासियों को ही यहां जमीन खरीदने, रोजगार पाने और सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के अधिकार हैं।

– इसके अलावा देश के किसी दूसरे राज्य का निवासी जम्मू-कश्मीर में जाकर स्थाई निवासी के तौर पर नहीं बस सकता है। वो यहां पर न ही जमीन खरीद सकता है और राज्य सरकार की नौकरी भी नहीं कर सकता है। इतना ही नहीं अगर जम्मू-कश्मीर की कोई महिला भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी कर ले तो उसके अधिकार छीन लिए जाते हैं।

पाकिस्तान में भी बढ़ी एक्टिविटी : दूसरी तरफ पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान में भी एक्टिविटी बढ़ गई है। सरहद पर जारी तनाव के बीच पाकिस्तानी सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने नियंत्रण रेखा(एलओसी) का दौरा किया। पुलवामा की घटना के बाद सेना प्रमुख का यह पहला दौरा है। इस दौरान बाजवा ने पाकिस्तानी सैनिकों को अलर्ट पर रहने के लिए कहा।

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