भक्त का जीवन संसार का सर्वोच्च...

वैष्णव पत्रिका :-आजकल कुछ लोगों की ऐसी धारणा हो गयी है कि भक्ति का साधन अत्यन्त सहज है, पाप-ताप दुराचार-अनाचार में फँसे रहते हुए भी हम पूर्ण भक्त बन सकते हैं। इसी से आज भारत में भक्तों की भरमार है। लोग काम,...

पुरूषार्थ और तपस्या के प्रतीक महर्षि...

वैष्णव पत्रिका :-महर्षि विश्वामित्र महाराज गाधि के पुत्र थे। कुश वंश में जन्म होने के कारण इन्हे ‘कौशिक‘ भी कहते हैं। वह अत्यंत प्रजापालक तथा धर्मात्मा सम्राट थे। एक बार वह सेना को साथ लेकर जंगल में शिकार खेलने के लिए गए।...

नवरात्रि है आदि शक्ति की आराधना...

वैष्णव पत्रिका :- नवरात्रि एक हिंदू पर्व है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है 'नौ रातें'। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति / देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि वर्ष में चार...

धर्म और संस्कृति की रक्षा के...

वैष्णव पत्रिका :- जिस जाति को अपनी संस्कृति, अपने पूर्वज, अपने आचार-विचार अपनी वेष-भूषा अपने खान पान और अपनी परम्परा गत निर्दोष पद्धतियों के प्रति हीनता की भावना, उपेक्षा-बुद्धि दोषबुद्धि और त्याज्यबुद्धि हो जाती है और 'पराया' सब कुछ अच्छा, उच्च, गुणयुक्त...

दुष्टों का दमन करने वाले :...

वैष्णव पत्रिका:- हमारे शास्त्र एवं पुराण प्रभु की महिमा से भरे पड़े है जिनमें लिखा है कि भगवान सदा अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा करने और हिरण्यकशिपु के आतंक को समाप्त करने के लिए भगवान ने...

जिसके दर्शन मात्र से ही मिल...

वैष्णव पत्रिका :- भारत में वैदिक काल से ही गाय का महत्व माना जाता है। आरम्भ में आदान-प्रदान एवं विनिमय आदि के माध्यम के रूप में गाय का उपयोग होता था और मनुष्य की समृद्धि की गणना उसकी गौसंख्या से की जाती...

जानिए शनिवार की कहानी

वैष्णव पत्रिका :- एक ब्राहमण था जिसके रोज पीपल सिंचने का नियम था। पीपल में से पिचरंगा बोलता-मैं तने लागू में तने लागू। ब्राहमण सुखने लग गया। ब्राहमणी को चिन्ता सताने लगी कि इतना अच्छे से खिलाती हूं, पिलाती हू फिर भी...

गंगा सप्तमी :- पापहारिणी – मोक्षदायिनी...

वैष्णव पत्रिका :- वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा माँ का जन्म हुआ था जबकि गंगा सप्तमी के दिन माँ गंगा का पुनर्जन्म हुआ था। इस...