मंगलवार की कहानी

मंगलवार की कहानी

मंगलवार की कहानी वैष्णव पत्रिका:- एक बुढ़िया माई थी जिसके हनुमान जी पूजा का बहुत नियम था। वह रोज एक रोटे का चूरमा बनाती, हनुमानजी को भोग लगाती और कहती- लाल लंगोटो हाथ में सोटो, ले बाबा तू साबुत रोटो। मैं तनू दोऊ तणापे तू मने दीए बुढ़ापे बहु देखती सासुजी चूरमा बनाकर रोज-रोज कहॉ ले जी है। एक दिन बहु ने कहा सासु जी आप को भाए जितना थाली पुरसा कर लवे, लेकिन गांव में बांटने के लिए नहीं। बहु सासु को थाली पुरसकर दे देती सासु उसका आधा बजरंग बली को भोग लगा देती। अब बहु सासु को चौथाई भोग लगा देती, चौथाई थाली देने लगी तो पूरा भोग लगा आई। अब बहु ने देना बन्द कर दिया। सास भूखी प्यासी कमरे में बन्द हो गई। रात को हनुमान जी आए और बोले- लाल लंगोटो हाथ में सोटो, ले माई तू सापतो रोटा। डोकरी माई ने रोटा लेकर चूरमा बनाया बजरंग बली के भोग लगाया और खुद खा लिया। इसी तरह दिन बीतने लगे। एक दिन बहु सोची इतने दिन हो गए सासुजी बिना खाए पीए हैं, फिर भी मोटी तगड़ी हो रही है। पोता पोती को पीछे लगा दिया जाओ देखो दादी क्या खाती है। बच्चों ने देखा रात को हनुमान जी आए रोटा दिया बुढ़िया चूरमा बनाकर भोग लगाई और खुद भी खाई एवं बच्चो को भी खिलाया। सुबह बच्चे मॉ को जाकर बोले मॉ- मॉ दादी के एक लाल मुंह का बन्दर आता है और रोटा देके जाता है। इधर घर में धन संपति का विनाश होने लगा। दूसरे दिन बहु रात को चुपचाप देखती रही जैसे ही बजरंग बली आए, बहु ने उनका पांव पकड़ लिया। बजरंग बली बोले-अरे पापिन मैं बाल ब्रह्मचारी हूं तू मेरा पांव मत पकड़ मुझे छोड़ दे। बहु ने कहा आप मुझे माफ कर दीजिए तभी मैं पांव छोडूंगी। हनुमान जी ने कहा- तूने मेरे भक्त को पूजा करने से रोका अब मुझसे क्यो माफी मांग रही हो। उसने कहा- मेरी आंखे खुल गई, अब मैं मना नहीं करूंगी। और हम सभी मिलकर पूजा करेंगे। हनुमान जी ने कहा- जाओं अब सब ठीक हो जाएंगा। उसके बाद बहु बेटा भी मॉ के साथ हर मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करने लगे। वैष्णव पत्रिका

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